कैनबरा में कक्षा 11-12 वाले सरकारी स्कूल (फोटो लेख)
कैनबरा में सरकारी स्कूल जहां 11 व 12 कक्षाओं की पढ़ाई होती है, उनको कालेज या सीनियर सेकेंडरी कालेज कहा जाता है। प्राइमरी-स्कूल, हाई-स्कूल व कालेज सबके अपने-अपने कैंपस व भवन होते हैं।
इन स्कूलों को संचालित करने के लिए निदेशक मंडल होता है। निदेशक मंडल में स्कूल के छात्रों, छात्रों के माता-पिता/अभिभावक, शिक्षक व समाज के प्रतिनिधि निदेशक के रूप में होते हैं। निदेशक मंडल का एक सचिव भी होता है लेकिन उसे निदेशक नहीं माना जाता है, न ही उसे मतदान करने का अधिकार होता है।
निदेशक मंडल
- 3 निदेशक स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों के माता-पिता/अभिभावक में से।
- 2 निदेशक स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों में से।
- 2 निदेशक स्कूल के स्टाफ में से।
- 1 निदेशक स्कूल का प्रधानाचार्य।
- 1 निदेशक सरकार की ओर से (यह दिहाड़ी मजदूर से लेकर प्रोफेसर/कुलपति या सरकारी अधिकारी या अन्य कोई भी हो सकता है)
निदेशक मंडल का अध्यक्ष (चेयरपरसन) अपवाद घटनाओं को छोड़कर छात्रों में से ही होता है। 9 निदेशकों में से केवल 3 निदेशक ही स्कूल स्टाफ से होते हैं। 9 निदेशकों में से 5 निदेशक व निदेशक मंडल का अध्यक्ष छात्र व उनके माता-पिता/अभिभावक में से होते हैं। निदेशक मंडल स्कूल की नीतियां, योजनाएं, फंड का लेखा-जोखा, व अन्य दिशा निर्देश इत्यादि तय करता है। चूंकि स्कूल के निदेशक मंडल में छात्रों व अभिभावकों का आधिपत्य रहता है, इसलिए स्कूल स्टाफ की मनमानी व भ्रष्टाचार इत्यादि की संभावना नहीं रहती है।
स्कूल को संचालित करने व नीतियां निर्धारित करने में छात्रों की भागीदारी बहुत अधिक होती है। स्कूल के निदेशक मंडल में होने के अतिरिक्त छात्रों की अपनी अलग छात्र-समिति भी होती है, जो स्कूल के निदेशक मंडल को सुझाव देने का कार्य करती है।
स्कूल के लिए निदेशक मंडल, छात्र समिति के अतिरिक्त अभिभावक व स्थानीय समाज के लोगों की भी एक समिति होती है, जो स्कूल के निदेशक मंडल को सुझाव देने का कार्य करती है।
चित्र (12 फोटो)
इस लेख में कैनबरा के 11 व 12 कक्षाओं वाले पांच से छः अलग-अलग स्कूलों की कुछ फोटो दी गईं हैं ताकि आपको यहां के सरकारी स्कूलों के बारे में कुछ अंदाजा लग सके।












February 4, 2020 @ 12:44 am
वहाँ अनुसूचित जातियों,अनुसूचित जन जातियों,अल्पसंख्यकों,समाज के पिछडे जातियों और महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए क्या प्रावधान है ???
February 4, 2020 @ 4:02 am
भारतीय समाज के अलावा किसी समाज में जाति नहीं होती, इसलिए अनुसूचित जातियों,अनुसूचित जन जातियों, पिछड़ी जातियों इत्यादि का औचित्य ही नहीं। यहां धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होता, इसलिए अल्पसंख्यक का कोई मतलब नहीं बनता। महिलाओं की भागीदारी बहुत ही अधिक है। पुरुष व महिला में भेदभाव नहीं होता।
अब रही बात ऑस्ट्रेलिया के आदिवासियों की तो ऑस्ट्रेलिया में आदिवासियों को बहुत ही अधिक सुविधाएं प्राप्त हैं। इसके अलावा आदिवासियों को हर स्तर पर आरक्षण प्राप्त है, वह भी जितने प्रतिशत उनकी जनसंख्या होती है, उतने प्रतिशत आरक्षण।
February 4, 2020 @ 1:28 am
व्यवस्था जो भी हो ,लेकिन कमिटी की संरचना बिल्कुल लोकतांत्रिक है/ भारत में दिल्ली में केजरीवाल जी संरचनात्मक आवरण कुछ स्कुल जरूर अच्छे कर दिये है, लेकिन कमिटी का जो लोकतांत्रिक संरचना आप बता है/ शायद ही हूआ होगा/
February 4, 2020 @ 3:57 am
आप यहां के सरकारी स्कूलों व दिल्ली के सरकारी स्कूलों की तुलना दूर-दूर तक नहीं कर सकते।
February 4, 2020 @ 2:37 am
Bahut sunder h govt school aisha partik hota h ki iske tulna me bharat ka school chahe govt ho ya non-govt ki schhol nahi hoga …. Thoda oha ke sarkari school ka fee bhi batane ka kast kare…
Ati sunder me kabhi sapna me nahi soch sakta tha ki aisha bhi govt ki school hoti hongi..aapko koti koti dhanywad
February 4, 2020 @ 3:55 am
सरकारी स्कूल में पढ़ाई करने की फीस नहीं होती। पढ़ाई व बहुत ही अच्छा भोजन व लैपटाप इत्यादि सरकार की ओर से उपलब्ध होता है।
February 4, 2020 @ 3:21 am
🙏 🙏
February 4, 2020 @ 3:26 am
क्या बेहतरीन व्यवस्था है बच्चों को एक ज़िम्मेदार नागरिक बनाने के लिए .. 👍🏽👍🏽
February 4, 2020 @ 3:54 am
सरकारी हाईस्कूल (7 से 10 कक्षा) स्कूल में भी ऐसा ही निदेशक मंडल होता है।
February 4, 2020 @ 12:24 pm
क्या कहें, भारत में शायद ऐसा कभी हो ही नहीं। आकण्ठ भ्रष्टाचार में लोग डूबे हुए हैं।
February 4, 2020 @ 3:56 pm
जब लोग व समाज ईमानदार व परिपक्व हो जाएंगे, तब होना शुरू हो जाएगा
February 4, 2020 @ 1:31 pm
अभी भारत में रह रहे दसवीं उत्तीर्ण विद्यार्थी अगर कैनबरा के इन विद्यालयों में 11वीं कक्षा में प्रवेश पाना चाहे तो उनके लिए अन्य वांछित योग्यता एवं शर्तें क्या होगी ..क्या भारतीय बच्चे वहां प्रवेश पा सकते हैं?
February 4, 2020 @ 3:58 pm
बिलकुल भारतीय बच्चे प्रवेश पा सकते हैं। लेकिन विदेश आने वाले बच्चों को फीस देनी पड़ती है, रहने खाने का खर्च भी उठाना पड़ता है। यदि आप बच्चे की विस्तृत जानकारी दें तो मैं स्कूलों से जानकारी लेने का प्रयास कर सकता हूँ।
February 7, 2020 @ 3:22 am
भारत में दिल्ली की खूब चर्चा है पर ऑस्ट्रेलिया को शायद ही छू पाए।
मैं तो सना हूं दिल्ली में भी MDM me गुणवत्तपूर्ण भोजन नहीं मिल पाता